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विध्यक्षेत्र में बढ़ा काले हिरण की दुर्लभ प्रजाति का कुनबा- दैनिक जागरण


mzp may2019 dainikjagran

विध्यक्षेत्र के हलिया वनरेंज अभ्यारण्य में दुर्लभ प्रजाति के काले हिरण का कुनबा बढ़कर 274 पहुंच गया है। जबकि इसी परिवार से मिलते-जुलते चीतलों की संख्या 75 है। आठ वर्ष बाद हुए वन्य जीवों की गणना में तेंदुआ की संख्या 12 पाई गई है जिसमें सात नर व पांच मादा हैं। वन विभाग की मानें तो तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी क्योंकि इन में से कुछ मादाएं शावक को जन्म देने वाली हैं। वन रेंज अभ्यारण्य में वन्य जीवों के अलावा जंगली पशु और पक्षियों की भी कई दुर्लभ प्रजातियां पाई गई हैं जिनके संरक्षण कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

जनपद के अलावा सोन नदी के किनारे तक 501 वर्ग किलोमीटर में फैले कैमूर वन्य जीव विहार में वन्य जीवों की कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। तेंदुआ, हाइना, लकड़बग्घा, सियार, भालू, चीता, जंगली सुअर, करातल, बिज्जू, चीतल, चिकारा, सांभर, लंगूर, चौसिंहा सहित कई प्रकार के वन्य जीव मौजूद हैं। इसके अलावा मगरमच्छ और करैत व कोबरा जैसे सर्प की प्रजातियां पाई जाती हैं। बीते 23 से 26 मई के बीच हलिया वनरेंज के हलिया द्वितीय, सगरा, कुशियरा, हर्रा, उमरिया, परसिया चौरा, पड़री बीट में गिनती कराई गई जिसमें दुर्लभ प्रजाति के काले हिरणों की संख्या 274 पाई गई। प्रभागीय वनाधिकारी राकेश चौधरी ने बताया कि काले हिरण की जो प्रजाति हमाने अभ्यारण्य में मौजूद है, ऐसा दूसरी जगह नहीं मिलेगा। इनके परिवार आपस में घुल मिलकर रहते हैं। साथ ही चीतलों के भी आधा दर्जन झुंड हैं जिनकी संख्या 74 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि वन्य जीवों की गणना के बाद हमारा अगला कदम इनके संरक्षण और आबादी बढ़ाने पर है जिसमें मौसम का भी बड़ा योगदान होता है। दलदली जमीन व घना जंगल

हलिया वनरेंज अभ्यारण्य की बात करें तो यहां कई जगहों पर जंगल में दलदली जमीन है, जहां कई तरह की जड़ी बूटियां भी पाई जाती हैं। मुख्य रुप से शीशम, टीक, साल, जामुन, महुआ के अलावा सिद्धा, कोरैया और झींगर जैसी वनस्पतियां पाई जाती हैं जिनका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है। घने जंगल में बांस, पलाश और खैर की बहुतायत संख्या है। चिड़ियों की अनगिनत प्रजातियां

वनरेंज क्षेत्र में तीतर और बटेर के अलावा बुलबुल, गौरैया, कबूतर, बाज, किगफिशन पक्षी, फ्रैंकलिन, बत्तख और तितलियों की सैकड़ों प्रजातियों की भरमार है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो लगातार बढ़ रही गर्मी और बारिश कम होने के कारण पक्षियों की संख्या में कमी आई है लेकिन पूरे कैमूर वन्य अभ्यारण्य में कई जगहों पर पानी है जिससे पक्षी गर्मियों में उन क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं।

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हलिया वनरेंज में वन्य जीव

तेंदुआ- 12

काला हिरण- 274

वनरोज- 332

सांभर- 18

चीतल- 75

भालू- 15

जंगली सुअर- 113

बंदर- 159

लोमड़ी- 45

लकड़बग्घा- 12

मगरमच्छ- 55

लंगूर- 104

लोमड़ी- 45

सियार- 67

मोर- 59

गिद्ध- 60

जंगली बिल्ली- 2

चिकारा- 9

खरगोश- 17

-----------------------वर्जन

'वन्य जीवों की गिनती के साथ ही इनके परिवार व इनके रहने के स्थान का डाटा भी तैयार किया गया है। पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी इन जीवों के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है।'

- राकेश चौधरी, प्रभागीय वनाधिकारी

 

स्रोत- https://www.jagran.com/uttar-pradesh/mirzapur-the-rare-species-of-black-deer-grown-in-the-postdivision-19263751.html

Tags: Biodiversity & Wildlife

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