साधारण नाम : लकड़बग्घा / Striped hyena
वैज्ञानिक नाम : Hyaena hyaena
भौगोलिक सीमा : उत्तरी और पूर्वी अफ्रीका, मध्य पूर्व (middle east), भारत और एशिया, उत्तर में दक्षिणी साइबेरिया तक फैला हुआ है।
आवास : लकड़बग्घा चट्टानी पहाड़ियों, बीहड़ों और दरारों, सवाना तथा अर्ध-मरुस्थलों में अपना माँद बनाता है जहाँ अन्य बड़े शिकारी जानवर बहुत मुश्किल से रह पते हैं। उनके वास स्थल के 10 किलोमीटर के भीतर कम से कम एक जल स्रोत होना चाहिए।
भौतिक विशेषताएं / पहचान :
- ऊंचाई - 66 से 75 से.मी. (कंधों के पास)
- लंबाई - सिर-पूँछ की लंबाई: 100 से 115 सेमी.
- पूंछ की लंबाई - 30-45 सेमी
- वजन - नर - 26 - 41 किग्रा, मादा - 26 - 34 किग्रा.
- धारीदार लकड़बग्घा - धब्बेदार और भूरे रंग के लकड़बग्घे से थोड़े छोटे होते हैं।
- उसके पास गहरी आंखों के साथ बड़ा सिर होता है जिसपर दो बड़े कान होते हैं।
- उसका थूथन मोटा और बड़ा होता है।
- उसका थूथन, कान और गला काले रंग का होता है।
- इसका कोट सुनहरे पीले, भूरे या भूरे रंग का होता है।
- इसके शरीर और पैरों पर काली धारियाँ होती हैं।
- इसके गर्दन से पीठ तक पीछे की तरफ लंबे बाल होते हैं ।
- लकड़बग्घे का सामने वाला पैर पीछे के पैरों की तुलना में अधिक लंबे होते हैं।

लकड़बग्घा (फोटो: विंध्य बचाओ)
भोजन की आदत :
- धारीदार लकड़बग्घा लंबे समय तक बिना पानी के जीवित रह सकता है।
- उसके शक्तिशाली जबड़े और मजबूत दांत मांसाहारी भोजन का संकेत हैं।
- वे कुशल शिकारी होते हैं जो अपेक्षाकृत बड़े शिकार करने में सक्षम होते हैं।
- कुछ लकड़बग्घे भेड़, बकरियों, गधों और घोड़ों का भी शिकार करते हैं।
- लकड़बग्घा मुख्य रूप से रात में भोजन की तलाश में निकलता है।
- इसके आहार में मुख्य रूप से मरे हुए जानवर के लाश और और कचड़ा शामिल रहता है।
- यह मानव बस्तियों, फलदार पेड़ों, बड़ी शिकार तथा कचरे के ढेर के आसपास चक्कर लगाता रहता है।
- लकड़बग्घा हवा में मरे हुए जानवर की गंध सूंघ कर उसके तरफ ही जाता है।
- यह फल, कीड़े और कभी-कभी पक्षियों और छोटे जानवरों को मारकर अपना आहार पूरा करता है।
- लकड़बग्गा वनों के सफाई कर्मी का भी काम करता है।
प्रजनन :
- लकड़बग्घा का गर्भ काल 90 से 91 दिन तक रहता है जिसके बाद 1 से 5 (ज्यादातर 2 से 4) बच्चे जन्म लेते हैं।
- बच्चे 2 साल तक अपनी परिवार के देख-रेख में रह कर भोजन एकत्र करने और शिकार की तकनीक सीखते हैं।
जीवनकाल :
- लकड़बग्घा चिड़ियाघरों में 20-25 साल तक तथा जंगल में 10 से 12 साल तक जीवित रहता है।
व्यवहार :
- लकड़बग्घे अपनी तीक्ष्ण दृष्टि, तीव्र श्रवण (बड़े कान), और गंध की गहरी भावना के साथ, रात में अपने क्षेत्र में गश्त करते हैं।
- लकड़बग्घे अपने अनूठे गंध से अपने क्षेत्र के सीमा को चिह्नित करते हैं।
- इसके बड़े सिर और बड़े दांतों से भरे मजबूत जबड़े हड्डियों को कुचलने/चबाने में सक्षम होते हैं।
- लकड़बग्घा आक्रामक नहीं होता है और आमतौर पर अन्य जानवरों के आस पास जाने से बचता है।
- वह बड़ा दिखने के लिए अपने बाल को बढ़ा/खड़ा कर लेता है।
पद चिन्ह :

लकड़बग्घा के पद चिन्ह (Reading pugmarks, WWF)
पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका :
- लकड़बग्घा सफाई दल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संरक्षण स्थिति :
- सड़क पर मारे गए जानवर को खाने के दौरान लकड़बग्घे वाहनों से टकरा कर मर जाते हैं।
- धारीदार लकड़बग्घा मनुष्यों के साथ बढ़ते संघर्ष, शिकार तथा प्राकृतिक वास के नष्ट होने से खतरे में हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के अक्टूबर 2014 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “संकट-निकट (Near Threatened या NT)” श्रेणी मे रखा गया है।
- लकड़बग्घा को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची III के तहत संरक्षित किया गया है।
स्रोत :
- Reading Pugmarks: A pocket guide for forest guards, Tiger & Wildlife Programme, 2005. WWF
- https://animaldiversity.org/accounts/Hyaena_hyaena/
- https://animals.sandiegozoo.org/animals/striped-hyena
- http://animalia.bio/striped-hyena
- https://www.wwfindia.org/news_facts/?uNewsID=18881
- https://www.iucnredlist.org/species/10274/45195080
