Vindhyan Ecology and Natural History Foundation- Animated Header

साधारण नाममगरमच्छ / Muggar / Crocodile / mugger crocodile /marsh crocodile / broad-snouted crocodile

वैज्ञानिक नाम : Crocodylus palustris

भौगोलिक सीमाभारत, ईरान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश (संभवतः विलुप्त)

आवास :

  • भारत में साफ जल के स्रोतों जैसे झील, तालाब तथा मंदगति वाली नदियाँ, दलदली भूमि और कच्छ भूमि/खाड़ी में रहते हैं।
  • यह मानव निर्मित जलाशयों में भी रहता है।
  • यह 5 मीटर तक गहरे पानी में रह सकता है।

भौतिक विशेषताएं / पहचान :

  • लंबाई – 4 से 5 मीटर
  • वयस्क मगरमच्छ का पुंछ 1.8 मीटर तक लंबा होता है।
  • वजन – लगभग 700 किलोग्राम
  • मगर के मुंह में 66-68 दांत होते हैं।
  • इसका थूथन मगरमच्छ प्रजाति के दूसरे सभी सदस्यों से चौड़ा होता है।
  • इसका पूरा शरीर मोटे मट-मैले भूरे रंग के पपड़ी से ढका होता है।
  • नर और मादा में सिर्फ लंबाई का अंतर होता है, मादा छोटी होती है।
DSC02614
मगरमच्छ (फोटो- देबादित्यो सिन्हा / विंध्य बचाओ)
 
 
भोजन की आदत :
  • मगरमच्छ मांसाहारी होता है।
  • वह छोटे मगरमच्छ तथा दूसरे छोटे जानवरों को खाने में सक्षम है।
  • वे पक्षियों, चमगादड़ों और कीड़ों को भी पकड़ कर खाते हैं।
  • मगर दूसरे प्रजातियों के अंडे भी खाते हैं।
  • बड़े वयस्क हिरण और भैंसों को भी मारकर खा सकते हैं।

प्रजनन :

  • नर मगरमच्छ 12-15 साल में यौन परिपक्वता प्राप्त करते हैं।
  • मगरमच्छ अपने घोंसले के लिए बिल बनाते हैं।
  • मगर साल में 2 बार अंडे देता है जिसमे 25 से 30 अंडों का समूह होता है।

 

जीवनकाल :

  • मगर लगभग 25 से 30 साल तक जीवित रह सकते हैं।

 व्यवहार :

  • मगर का त्वचा संवेदनशील अंग होता है जिससे वह पानी के अंदर कंपन को महसूस करता है।
  • मगरमच्छ अपने शरीर के तापमान को धूप तापकर तथा माँद में छिप कर नियंत्रण में रखता है।
  • मगर के घोंसले को नष्ट करने या उसे परेशान करने पर वह हमलावर हो जाता है।

पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका :

  • मगरमच्छ अपने पारिस्थितिकी तंत्र का शीर्ष शिकारी है।
  • मगरमच्छ साफ पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के संरचना और गतिविधि को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाता है।

संरक्षण स्थिति :

  • मगरमच्छ के चमड़े से उत्पाद बनाने के लिए इसका शिकार किया जाता है।
  • पुराने पीढ़ी के लोग मानते हैं की इसकी हड्डियों और पपड़ी (scales) में औषधीय गुण होते हैं, जो शिकार का कारण है।
  • काले बाजार में बेचने के लिए शिकारी इसके अंडे भी चुरा लेते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के जून 2009 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “असुरक्षित (Vulnerable या VU)” श्रेणी मे रखा गया है।
  • मगरमच्छ को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची I के तहत संरक्षित किया गया है।

स्रोत :

  • https://www.iucnredlist.org/species/5667/3046723
  • https://animaldiversity.org/accounts/Crocodylus_palustris/
  • https://crocodilian.com/cnhc/csp_cpal.htm