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साधारण नाम :  घड़ियाल / Gharial /Gavial / Fish-eating crocodile

वैज्ञानिक नाम : Gavialis gangeticus

भौगोलिक सीमाभारत, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और बांग्लादेश । भारत में सोन, चंबल नदी, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य / जलाशय (गिरवा नदी पर), कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान और गंडक नदी में पाया जाता है।

आवास : तेज बहाव वाले ताजे पानी की नदियों में रहते हैं।

भौतिक विशेषताएं / पहचान :

  • लंबाई - 3 से 6 मीटर (नर), 2.5 से 4 मीटर (मादा)
  • वजन – 150  से 250  किलोग्राम
  • घड़ियाल का मुंह लंबे, पतले थूथन से बना होता है। 
  • नर घड़ियाल के थूथन के अंत में एक घड़ा जैसा आकार बना रहता है, जिससे इसे घड़ियाल बोला जाता है।
  • मादा घड़ियाल नर से छोटी होती है तथा उसकी थूथन भी छोटा होता है।
Gharial
घड़ियाल  (फोटो- देबादित्यो सिन्हा / विंध्य बचाओ)

भोजन की आदत :

  • छोटे घड़ियाल छोटे जानवरों, जैसे कि कीड़े, क्रस्टेशिया (केकड़े, झींगे), मेंढक खाते हैं।
  • धीरे धीरे घड़ियाल का थूथन पतला और लंबा हो जाता है, तब वे सिर्फ मछली ही खाते हैं।
  • घड़ियाल अपने पतला थूथन तथा तेज दांतों से बहुत ही कुशलता से मछली पकड़ता है।
  • पतले जबड़े से पानी के भीतर शिकार के दौरान कम प्रतिरोध बनाता है।

प्रजनन :

  • घड़ियाल वर्ष में एक बार प्रजनन करते हैं तथा मार्च से मई के बीच अंडा देते हैं।
  • 60 से 80 दिनों तक अंडों को सेने के बाद 35 से 60 बच्चे जन्म लेते हैं।

 

जीवनकाल :

  • घड़ियाल लगभग 29 साल तक जीवित रह सकते हैं।

व्यवहार :

  • घड़ियाल नदी के घुमावदार और धीरे बहाव वाले हिस्सों में जहाँ पानी गहरा रहता है, इकट्ठा होते हैं।
  • इसके मुंह में बहुत ही तेज दांत होते हैं जो मछली को पकड़ने के लिए ही बने हैं, जो की इसका मुख्य आहार भी है।
  • घड़ियाल हमेशा पानी में ही रहना पसंद करता है तथा सिर्फ धूप सेंकने और घोंसला बनाने के लिए ही बाहर निकलता है।
  • घड़ियाल केवल धूप सेंकने और घोंसले बनाने के लिए ही पानी से निकलते हैं।

 

पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका :

  •  भारतीय घड़ियाल मुख्य रूप से मछली के महत्वपूर्ण शिकारी हैं।
  • घड़ियाल पर्यटकों को आकर्षित करके स्थानीय समुदायों को लाभान्वित करते हैं।
 

संरक्षण स्थिति :

  • अतिक्रमण, अनियंत्रित मछली पकड़ने और शिकार घड़ियाल के लिए खतरा है।
  • औषधीय उपयोगों के लिए घड़ियाल के अंडे एकत्र किए जाते हैं।
  • नर मगरमच्छों को उनके घड़ा के लिए शिकार किया जाता है।
  • बांध, बैराज और नदी से अत्यधिक पानी निकालने से इसके प्राकृतिक वास नष्ट हो रहे हैं।
  • घड़ियाल के लंबे मुह और थूथन के कारण मछली पकड़ने के जाल में फंसने से जान चली जाती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के दिसम्बर 2017  के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “घोर-संकटग्रस्त (Critically Endangered या CR)” श्रेणी मे रखा गया है।
  • घड़ियाल को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची I के तहत संरक्षित किया गया है।

स्रोत :

  • https://www.iucnredlist.org/species/8966/149227430
  • https://animaldiversity.org/accounts/Gavialis_gangeticus/
  • https://www.nationalgeographic.com/animals/reptiles/g/gharial/
  • https://www.wwfindia.org/about_wwf/priority_species/threatened_species/gharial/
  • http://www.edgeofexistence.org/species/gharial/