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साधारण नाम : शियार / गीदड़ / Golden Jackal / Common Jackal

वैज्ञानिक नाम : Canis aureus

भौगोलिक सीमा : उत्तरी और पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी यूरोप और दक्षिण एशिया से म्यांमार तक

आवास : गीदड़ शुष्क खुले क्षेत्र, सूखे घास के मैदान और स्टेपपे लैंडस्केप को पसंद करते हैं।

भौतिक विशेषताएं / पहचान :

  • लंबाई - 70 से 85 सेंटीमीटर
  • ऊंचाई – 40 सेंटीमीटर
  • पुंछ – 25 सेंटीमीटर
  • वजन – 8 से 10 किलोग्राम
  • इसके फर मोठे और ज्यादा लंबे नहीं होते हैं।
  • फर का रंग सुनहरे और भूरे रंग के मिश्रण जैसा होता है जो की अलग अलग मौसम और क्षेत्र में भिन्न हो सकता है।
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गीदड़ (फोटो : विंध्य बचाओ)

भोजन की आदत :

  • स्वर्ण सियार 54% माँस और 46 % पौधे से प्राप्त भोजन करते हैं।
  • गीदड़ अच्छा शिकारी है जो छोटे जानवरों का शिकार करता है।
  • गीदड़ अवसरवादी होते हैं जो छोटे चिंकारा, हिरण, खरगोश, पक्षी और उनके अंडे, सरीसृप, मेंढक, मछली, कीड़े और फल भी खाते हैं।
  • यह दूसरे बड़े शिकारी (जैसे शेर/बाघ) के शिकार में अपना हिस्सा लेता है।
  • दूसरे जानवर को अपने तरफ आते हुए देख कर गीदड़ अपने शिकार को दफन कर के छिपा देते हैं।

प्रजनन :

  • नर और मादा गीदड़ ज्यादातर जोड़ों में रहते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय एशिया में साल में कभी भी बच्चों को जन्म देते हैं।
  • एक बार में 1 से 9 (ज्यादातर 2 से 4) बच्चे पैदा होते हैं।
  • जन्म के समय बच्चों का औसत वजन 200 से 250 ग्राम तक होता है।

जीवनकाल :

  • गीदड़ 16 वर्षों तक जीवित रह सकता है।

व्यवहार :

  • गीदड़ एक साथ / झुंड में शिकार करते हैं।
  • परिवार के सदस्य बड़े शिकार को साझा करते हैं और पेट में रख कर बच्चों के लिए भी ले जाते हैं।
  • शिकारी गीदड़ 2 से 3 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखते हैं।
  • इनके परिवार में कुछ सहायक सदस्य भी होते हैं।
  • गीदड़ मानव बस्तियों के आस पास निशाचर रहता है तथा दूसरे जगहों पर आंशिक रूप से दिनचर भी होता है।
  • सियार गुफा की खुदाई करते हैं या चट्टानों के दरारों में या अन्य जानवरों द्वारा बनाए गए गुफे में भी रहते हैं।
  • गीदड़ पालतू कुत्तों और भेड़ियों जैसा व्यवहार करते हैं।
  • गीदड़ सामाजिक रूप से स्वागत समारोह तथा समूह में आवाज निकालते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका :

  • गीदड़ कस्बों और गांवों के आसपास कचरा और जानवरों के मांस खाकर सफाई कर्मी का महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • गीदड़ खेतों में मौजूद चूहे, खरगोश और दूसरे छोटे जानवरों को खाकर कृषि कार्य में मदद करते हैं।

संरक्षण स्थिति :

  • स्वर्ण सियार की जनसंख्या चारों ओर फैला हुआ है जिसे खतरा नहीं है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के जनवरी 2018 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “संकटमुक्त (Least Concern या LC)” श्रेणी मे रखा गया है।
  • गीदड़ को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची II के तहत संरक्षित किया गया है।
  • इनकी वर्तमान जनसंख्या में बढ़ने की प्रवृति दिख रहा है।

स्रोत :

  • https://www.iucnredlist.org/species/118264161/163507876
  • https://animaldiversity.org/accounts/Canis_aureus/
  • https://indiabiodiversity.org/species/show/257359