साधारण नाम : वनरोज / नीलगाय / Bluebull
वैज्ञानिक नाम : Boselaphus tragocamelus
भौगोलिक सीमा : भारत, नेपाल, पाकिस्तान, मेक्सिको तथा अमेरिका। नीलगाय का विकास भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ है। भारत से इसे अमेरिका तक निर्यात किया गया है।
आवास : वनरोज सूखे क्षेत्रों, घास के मैदानों, पहाड़ी क्षेत्रों आदि में रहते हैं।
भौतिक विशेषताएं / पहचान :
- शरीर की लंबाई – 180 से 200 सेंटीमीटर
- वजन - 120 से 240 किलोग्राम
- वनरोज में केवल नर के सिर पर सींगे उगती हैं, मादा के नहीं।
- वनरोज की सींगे ठोस, काली और नुकीली होती हैं जिसके ऊपर किसी प्रकार का खोल नहीं होता है।
- वनरोज की मादा के केवल दो थन होते हैं।
- वनरोज बकरियों के भांति लेडियों में मल त्याग करते हैं।
- वनरोज की गर्दन के नीचे दाढ़ीनुमा लंबे बाल गुच्छे में उगते हैं जो मादा में छोटे होते हैं।
- वनरोज के गर्दन की खाल तनी हुई तथा शरीर से चिपकी रहती है।
- वनरोज के पैरों में एक ही खुर होता है जो तेजी से दूर तक भागने में सहायक होते हैं।
- वयस्क नर के नीले रंग के कारण इसे नीलगाय नाम से जाना जाता है।
- वनरोज एशिया में मृग परिवार का सबसे बड़ा सदस्य है।

नीलगाय / वनरोज (फोटो: विंध्य बचाओ)
भोजन की आदत :
- नीलगाय के लिए घास मुख्य आहार है।
- एशिया में नीलगाय बड़े पौधे को भी खाते हैं।
- वे फल, फूल, बीज, पत्ते और तना भी खाते हैं।
प्रजनन :
- वनरोज का गर्भकाल 240 से 258 दिनों तक रहता है।
- वनरोज ज्यादातर जुड़वे बच्चे को जन्म देते हैं।
- नर 2½ साल के उम्र में वयस्क हो जाते हैं।
- वनरोज के केवल दो थन होते हैं।
जीवनकाल :
- वनरोज लगभग 21 साल तक जीवित रहते हैं।
व्यवहार :
- वनरोज लगभग 10 के झुण्ड में रहते हैं।
- कभी कभी 20 से 70 वनरोजों को भी एक साथ देखा जा सकता है।
- इनकी देखने और सुनने की क्षमता अच्छी होती है।
- खतरा महसूस होने पर वनरोज दहाड़ने जैसा आवाज निकालते हैं।
- वनरोज जंगल में नदी नालों के किनारे मानवजाति से दूर रहते हैं।
- इन्हे पालतू नहीं बनाया जा सकता है।
- वनरोज अपनी आँखों के नीचे के ग्रन्थि से निकलने वाले रस को झाड़ियों पर रगड़कर अपने झुण्ड के दूसरे सदस्यों से परस्पर संपर्क बनाये रखते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका:
- वनरोज खेतों में फसलों को चर कर बहुत नुकसान करते हैं।
- फल, फूल, बीज खा कर जंगली प्रजाति के बीजों के प्रसार मे भी मदद करते हैं।
संरक्षण स्थिति :
- नीलगाय को उसके माँस के लिए शिकार किया जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के जून 2016 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “संकटमुक्त (Least Concern या LC)” श्रेणी मे रखा गया है।
- वनरोज/नीलगाय को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसूची III के तहत संरक्षित किया गया है।
स्रोत :
